Aankhon Ki Gustaakhiyan Review LIVE Updates आंखों की गुस्ताखियां’में फूटा इमोशन्स का बम! विक्रांत मैसी और शनाया कपूर की एक्टिंग ने लूट ली महफिल - Uniknews24
---Advertisement---

Aankhon Ki Gustaakhiyan Review LIVE Updates आंखों की गुस्ताखियां’में फूटा इमोशन्स का बम! विक्रांत मैसी और शनाया कपूर की एक्टिंग ने लूट ली महफिल

By
Last updated:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

Aankhon Ki Gustaakhiyan Review LIVE Updates: विक्रांत मैसी और शनाया कपूर की जोड़ी बड़े पर्दे पर उतरी, जानिए कैसा रहा डेब्यू

शानदार इमोशन्स से भरी शनाया कपूर की डेब्यू फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में उनके अपोजिट नजर आ रहे हैं विक्रांत मैसी, जो एक संजीदा किरदार निभा रहे हैं। अगर आप वीकेंड पर ये फिल्म देखने का मन बना रहे हैं, तो पहले इसका रिव्यू जरूर पढ़ लें।

आज, यानी 11 जुलाई को दो फिल्में एक साथ थिएटर्स में टकराई हैं — एक तरफ शनाया की पहली फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’, और दूसरी ओर राजकुमार राव और मानुषी छिल्लर की ‘मालिक’। अब देखना ये होगा कि दर्शकों का दिल कौन सी फिल्म जीतती है। वैसे तो दोनों फिल्मों को लेकर चर्चाएं पहले से ही तेज़ थीं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर असली टकराव अब शुरू हुआ है।

शनाया कपूर, जो संजय कपूर की बेटी हैं, इस फिल्म के जरिए इंडस्ट्री में कदम रख रही हैं। करण जौहर ने खुद उनके लिए सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दी थीं। यह फिल्म रस्किन बॉन्ड की मशहूर शॉर्ट स्टोरी ‘The Eyes Have It’ से प्रेरित है और इसका निर्देशन किया है संतोष सिंह ने। फिल्म को प्रोड्यूस किया है मानसी और वरुण बागला ने, जबकि प्रजेंट किया है Zee Studios और Mini Films ने। विक्रांत यहां एक दृष्टिहीन संगीतकार के किरदार में नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं, कहानी से लेकर एक्टिंग तक क्या है खास।

क्या है फिल्म की कहानी?

कहानी एक ऐसे म्यूजिशियन ‘जहान’ की है, जो देख नहीं सकता लेकिन अपनी धुनों से हर एहसास को ज़िंदा कर देता है। वहीँ उन्हें ट्रेन में मिलती हैं थिएटर आर्टिस्ट ‘शबा शेरगिल’ — एक महत्वाकांक्षी लड़की जो अपने सपनों का पीछा कर रही है। ट्रेन का यह सफर दोनों के जीवन को एक बड़ा मोड़ देता है, जिसमें इमोशंस, कनेक्शन और न मिटने वाली यादें जुड़ी हैं। दोनों की बॉन्डिंग दिल को छूती है, लेकिन किस्मत कब रास्ते बदल दे… यही इस कहानी की असली परतें खोलता है।

कैसा है विक्रांत और शनाया का परफॉर्मेंस?

विक्रांत मैसी हर बार की तरह इस बार भी अपने अभिनय से प्रभावित करते हैं। एक दृष्टिहीन व्यक्ति का किरदार निभाते समय उनकी आंखें स्थिर हैं, लेकिन चेहरे के हाव-भाव और आवाज़ के उतार-चढ़ाव से वो किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी बारीकी से की गई एक्टिंग इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है।

दूसरी तरफ शनाया कपूर की यह डेब्यू फिल्म जरूर है, लेकिन उनका प्रदर्शन सहज और फ्रेश लगता है। हां, कुछ सीन्स में उनकी डायलॉग डिलीवरी थोड़ी कमजोर जरूर लग सकती है, मगर उनकी मासूमियत और स्क्रीन पर मौजूदगी बहुत प्रभावी रहती है। विक्रांत और शनाया की केमिस्ट्री स्क्रीन पर एकदम नेचुरल और दिलचस्प लगती है।

डायरेक्शन और म्यूजिक कैसा है?

निर्देशक संतोष सिंह ने एक सिंपल सी स्टोरी को गहराई और खूबसूरती के साथ पेश किया है। सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर और विजुअल फ्रेम्स बेहद संतुलित हैं। इमोशनल सीन में कैमरा जिस तरह एक्टर्स के एक्सप्रेशन को पकड़ता है, वो फिल्म को असरदार बनाता है।

कहानी की रफ्तार शुरुआती कुछ मिनटों में थोड़ी धीमी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह अपने ट्रैक पर आ जाती है। खासकर सेकंड हाफ में फिल्म रफ्तार पकड़ती है और दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी खुद मानसी बागला ने लिखी है, और उन्होंने इसे बड़ी सादगी के साथ शक्तिशाली बनाया है।

अगर बात करें म्यूजिक की, तो विशाल मिश्रा का काम शानदार है। फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘आंखों की गुस्ताखियां’ जो जुबिन नौटियाल ने गाया है – वो कानों को सुकून देने वाला है और फिल्म की थीम को बखूबी बयां करता है।

निष्कर्ष:
आंखों की गुस्ताखियां’ एक दिल छू लेने वाली फिल्म है, जिसमें इमोशन्स, म्युज़िक और परफॉर्मेंस का संतुलन अच्छा बैठता है। विक्रांत मैसी के अनुभवी अभिनय के साथ-साथ शनाया कपूर का ईमानदार डेब्यू इस फिल्म को एक बार देखे जाने लायक बनाता है।

Sunil Solanki

My Name is Sunil Solanki, I Work as a Content Writer for Uniknews24 and I like Writing Articles

For Feedback - uniknews2@gmail.com

Leave a Comment

WhatsApp

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, योजना और सरकारी भर्ती की जानकारी के लिए Whatsapp Channel Join करे

Powered by Webpresshub.net